स्नेह और आशीर्वाद के साथ

19 जुलाई 2009

हँसो नहीं..हमें भी आता है कम्प्यूटर चलाना

हम बहुत दिनों से देखते थे कि कभी चाचा तो कभी पिताजी एक डब्बे के सामने बैठ जाते और पता नहीं क्या खट-पट करते रहते थे। हमें बड़ा ही अजीब सा लगता था यह सब पर कुछ भी समझ नहीं आता था। एक-दो बार हमने कोशिश की कि पता लगायें कि यह है क्या? अपनी मम्मी, दादी की गोद में चढ़कर सामने आये भी तो चाचा ने हमें सामने बैठने नहीं दिया।
अब हम बड़े परेशान कि क्या करें, तो हमने रोना शुरू कर दिया। हमें मालूम था कि रोना शुरू करो तो कोई सुने या न सुने पर हमारी दादी और चाचा जरूर सुनेंगे। चाचा ने तुरन्त कहा कि ठीक है बैठाओ, इनकी फोटो दिखा दें। पर ये क्या पिताजी ने मना कर दिया। नहीं, रो-धोकर कोई काम न माना जाये। हमने सोचा लो ये हथियार भी बेकार गया। ये बहुत पहले की बात है।
अब कुछ दिन पहले हमने अपने आप जब कुर्सी पर, सीढ़ी पर चढ़ना सीखा तो सबसे पहले चढ़कर छत पर गये। नहीं...नहीं डरिये नहीं, दादी साथ में थीं, छत पर चढ़ने के अलावा एक दूसरी जगह भी चढ़ने का काम किया। पता है कहाँ? जी हाँ, वहीं....हमने मौका देखा और बस चाचा की सहायता से कम्प्यूटर वाली कुर्सी पर चढ़कर बैठ गये। अब हमें इसका नाम और काम समझ में आया।
जैसे ही हम चढ़े बस फिर क्या था हमने दो-चार हाथ-पैर मारे इधर-उधर। कभी की-बोर्ड पर, कभी माउस पर एक बार तो स्क्रीन पकड़ने ही दौड़े। आपको बतायें कि हमें रोकने वाला तो कोई था भी नहीं। पिताजी थे नहीं, चाचा और दादी रोकतीं नहीं, बस...।
हमारी हरकतें देखकर चाचा लग गये हमारी फोटो खींचने में और हम लग गये अपनी फोटो देखने में। हम खुशी के मारे इतना उछल रहे थे कि हमारी कोई भी फोटो साफ नहीं आ रही थी। तभी लगा कि पिताजी आ गये हैं तो हमने तुरन्त चाचा से कहा कि हमें नीचे उतार दो नहीं तो आपकी भी डाँट पड़ेगी।
एक बात और आपको बता दें कि हमें मोबाइल बहुत पसंद है। हमें जब भी मौका लगता है, मोबाइल उठाकर चाचा से बात करना शुरू कर देते हैं। हमें मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से भी रोका जाता है। सब लोग कहते हैं कि इससे कोई खतरनाक तरंग निकलतीं हैं। अब हमें क्या मालूम क्या खतरनाक है। हमें तो बस मजा आता है।
आप लोगों को बतायें कि कितने व्यस्त रहते हैं हम। चाचा से फोन पर बात, बुआ लोगों से बात, मामा लोगों से बात और भी बहुत से काम। अब बिना मोबाइल के कैसे निपटेंगे? अब कौन समझाये पिताजी को? चलो मान लेते हैं उनकी बात...ठीक है।


1 टिप्पणी:

रंजन ने कहा…

बहुत अच्छा चलाया..


प्यार..