स्नेह और आशीर्वाद के साथ

01 अगस्त 2009

मेरे घर आई एक नन्ही परी

कल हमारी बहुत व्यस्तता रही। घर में खुशी का माहौल था और हमारी खुशी तो पूछो ही नहीं। कारण, हमारी छोटी सी बहिन कल आई थी।

जी हाँ, आप सही समझे। कल रात को हमारे चाचा-चाची को पहली पुत्री हुई। हम तो बहुत खुश हुए। हमने अपनी छोटी बहिन को बहुत प्यार भी किया। कोई हमको छूने भी नहीं दे रहा था फिर हमने जिद करके उसको थोड़ी देर में छू कर देख भी लिया।

बहुत प्यारी है बिलकुल हमारी तरह है। सब लोग कह रहे थे कि हम भी जब हुए थे तो इसी तरह के दिखते थे। अब किसी को कौन समझाये कि हमारी बहिन हमारे जैसी नहीं होगी तो किसके जैसी होगी।

आपको बतायें अब इस रक्षाबन्धन पर अपने सनय दादा को हम अकेले ही राखी नहीं बाधेंगे, हमारे साथ हमारी छोटी सी बहिन भी राखी बाँधेगी।
अभी बहुत भागदौड़ है, आखिर चाची अभी अस्पताल में ही हैं। घर का और वहाँ का काम करना है। बहुत जिम्मेवारी होती है बड़ों के सिर पर। हाँ...हाँ...हम भी तो अब बड़े हो गये हैं।
चलिए अब आप लोगों से फिर मिलेंगे, अभी अपनी बहिन को देख आयें, पता चला कि बहुत रो रही है हमारे लिए।

2 टिप्‍पणियां:

Dr. Smt. ajit gupta ने कहा…

मेरी तरफ से अक्षयांशी को ढेर सारी बधाई और प्‍यार। अब तुम बडी हो गयी हो, अपनी छोटी सी परी को ढेर सारा प्‍यार देना। उसका अच्‍छा सा अपने जैसा नाम रखना और मुझे जल्‍दी से बताना। मैंने अपने ब्‍लाग पर एक लोरी पोस्‍ट की है उसे तुम भी सुनना और उसे भी सुनाना।

‘नज़र’ ने कहा…

बधाई, बहुत-बहुत बधाई!
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चाँद, बादल और शाम