स्नेह और आशीर्वाद के साथ

02 अगस्त 2009

एडवांस में भेज दी थी बहिन की राखी

आने वाली पाँच तारीख को रक्षाबन्धन है। इसी तारीख को हमारी बुआ की बेटी ‘गौरी’ का जन्मदिन भी है। राखी का त्योहार हम पिछले साल भी मना चुके हैं, तब हम बहुत छोटे थे। इस बार हम बड़े हो गये हैं।

इस बार हमने अपनी राखी अपने सनय दादा को भेज दी है। वे लखनऊ में रहते हैं और अभी उनके यहाँ आने की कोई उम्मीद भी नहीं है। एक बड़ी मजेदार बात हुई, चाचा अभी कुछ दिन पहले लखनऊ में ही थे और तब तक हमने अपनी राखी भेजी नहीं थी। चाचा को ये बात मालूम थी तो उन्होंने एक राखी हमारी ओर से लेकर सनय दादा को दे दी थी। बाद में हमने भी एक राखी भिजवा दी।

(ये हैं हमारे सनय दादा)


दो-तीन दिन बाद जब हमने बुआ से फोन से बात करके राखी मिलने के बारे में पूछा तो बुआ ने बताया कि चाचा राखी लेकर दे गये हैं। अब सनय दादा के पास दो राखी हो गईं थीं तो दादी ने कहा कोई बात नहीं, हो सकता है कि एक बहिन की राखी एडवांस में पहुँच गई हो।
दादी की बात सच भी निकली, हमारी छोटी सी प्यारी सी बहिन भी आ गई। अब यदि सनय दादा यहाँ आते हैं तो हम दोनों मिलकर उन्हें राखी बाँधेंगे।
अभी तो हम बस इन्तजार कर रहे हैं रक्षाबन्धन का।


6 टिप्‍पणियां:

रंजन ने कहा…

दादा को बोलो जल्दी से गिफ्ट भेज दे...

प्यार

परमजीत बाली ने कहा…

बहुत रोचक लिखा है।
रक्षाबन्धन की बधाई...एडवांस में।

Pakhi ने कहा…

Nice one....Happy Rakhi in advance.

Devendra ने कहा…

aa rahe hain ham bhi,
KHUSH RAHO.

डॉ0 ब्रजेश कुमार ने कहा…

kabhi sanay dada ko lekar aana

Dr.Aditya Kumar ने कहा…

तुम्हारी शैतानी में साथ देने एक बहिन और आ गयी. बधाई