स्नेह और आशीर्वाद के साथ

11 सितंबर 2009

ज से जहाज और अ से आम

इधर कुछ दिनों से हम लगातार कुछ न कुछ बोलने के मूड में रहते हैं। कोई मिलने आयेगा तो उससे बातें, किसी का फोन आ गया तो उससे भी बातें। मन बहुत करता है बातें करने का।
इस बोलने बतियाने के कारण कई सारे शब्द सीख भी लिए हैं। वैसे हमने बोलना तो बहुत पहले ही शुरू कर दिया था। जब हम पहली बार अपने नाना के घर गये थे, तब हम तीन माह के रहे होंगे। हमने उसी समय पापा कहना शुरू कर दिया था। हालांकि ऐसा बराबर नहीं कहते थे।
अभी चाचा हमारे साथ लगातार कई दिनों तक रहे। हम जब अपनी किताब खोल कर बैठते तो उसमें हमें भालू, चीता, जहाज, कुत्ता, भैया, दीदी बहुत ही पसंद आते। बस चाचा ने हमारी पसंद देखी और एक शब्द हमें सिखा दिया ज से जहाज।
हम बड़ी आसानी से इस शब्द को सीख भी गये। अब जब भी कोई पूछता है कि ज से, हम तुरन्त अपना हाथ आसमान की ओर ले जाकर कहते हैं जहाज। मम्मा और चाची ने सिखाया अ से आम।
आपको बतायें हम और भी कई शब्द बोल लेते हैं पर कई बार जानबूझ कर नहीं बोलते नहीं तो हमारे घर के लोग बस सारा दिन वही नया शब्द हमसे सुनते रहते हैं।

9 टिप्‍पणियां:

Pankaj Mishra ने कहा…

अ से आओ ज से जाओ :)

nice अक्षयांशी

Dr.Aditya Kumar ने कहा…

ज से जानकार भी होता है.तुम तो वैसे भी काफी जानकार हो .एक बार हम घर आये थे ,तुमने मेरा मोबाइल छीन कर उसकी रिंगटोन बदल दी थी. तुम तो होनहार बिरवान लगती हो.

Devendra ने कहा…

ये भी पढ़ा करो कि च से चाचा छ से छोटा चाचा

संगीता पुरी ने कहा…

इतनी कम उम्र में पढाई !!

डॉo लखन लाल पाल ने कहा…

chalo achchha hai, jahaj par sawaari karna aur jab ham aayen to hamen bhi ghumana. thik....

Dr. Harshendra Singh Sengar ने कहा…

जहाज उड़ने की आवाज करना तो हमने तुम्हें नहीं सिखाया। पता चला कि तुम आवाज निकाल कर बताती हो। वाह

AKSHAY KATOCH ने कहा…

bahut sundar, abhi se itna sara...

DEEPSHIKHA ने कहा…

baahar tahlte huye kya aam, jahaj dekh rahi ho?
khush raho

Udan Tashtari ने कहा…

बेटा,

उ से उड़नतश्तरी बोलो!!!

उ..ड़..न...त..श्त..री..

उड़नतश्तरी

-शाबास!!!बहुत इन्टेलिजेन्ट बच्ची.