स्नेह और आशीर्वाद के साथ

12 सितंबर 2009

दादी की गोद सबसे सुरक्षित जगह है

ज से जहाज तो उड़ गया, अब? ये बात कोई और तो समझेगा नहीं कि हमें करना क्या है? कहना क्या है? अभी तो स्थिति ये है कि हम ही बोलते हैं और हम ही समझते हैं। कभी-कभी कुछ शब्द ऐसे निकल जाते हैं जो औरों की समझ में आ जाते हैं तो हमें बहुत अच्छा लगता है कि चलो कोई तो है जो हमारी बात को समझ रहा है।
समझ और अधिक विकसित करने के लिए आवश्यकता होती है ज्ञान की। हम पढ़ भी रहे हैं। सिर्फ कोर्स की किताबें पढ़ते रहने से कुछ नहीं होगा। तो हमने समाचार-पत्र भी पढ़ना शुरू कर दिया।
पढ़ने का तो हाल ये है कि अभी कुछ दिनों पहले हमारे पिताजी अपने लिए नई कुर्सी लेकर आये थे। हमने भी मौका निकाला और जा बैठे।
मन भर गया तो उतर कर सामान इधर-उधर करना शुरू कर दिया। ये देख हमारी मम्मा को लगा कि हम शैतानी कर रहे हैं। अब उन्हें कौन समझाये कि हम कमरे का सामान सही कर रहे हैं। जब उन्हें नहीं समझा पाये और हमें लगा कि कहीं हम अब डाँट न खा जायें हमने चुपचाप दादी की गोद में बैठना सही समझा।
अब हम तो हम हैं, शान्त तो रहना ही नहीं था। बस मम्मा को जीभ दिखा कर चिढ़ाना शुरू कर दिया। हमें मालूम था कि दादी की गोद में हमारा कोई कुछ नहीं कर सकता है।
मम्मा को भी ये पता है तो वो भी हमें दूर से ही डराने लगीं। हमने भी कुछ नहीं देखा और अपनी आँखें बन्द कर लीं। खूब डराते रहो, हमें तो कुछ दिख ही नहीं रहा।

6 टिप्‍पणियां:

Devendra ने कहा…

shabas, kisi din MUMMA se pitogi tab pataa chalega.

Mithilesh dubey ने कहा…

अब इतनी प्यारी बच्ची को कोई डाटेगा तो वह दादी के पास तो जायेगी ही। आप चिन्ता ना करो मैं आपके मम्मा से बात करुगां।

संगीता पुरी ने कहा…

तुम्‍हें बहुत जल्‍दी सुरक्षित जगह का पता चल गया !!

Dr. Harshendra Singh Sengar ने कहा…

mummy ko aise nahin chidate hain. buri baat. sabko achchhi baaten bataya karo. theek.

सैयद | Syed ने कहा…

वाह !! आपको भी सुरक्षित जगह का पता चल गया....

बचपन में हम भी मम्मी की डांट से बचने के लिए दादी की गोद में ही छिपते थे...

Dr.Aditya Kumar ने कहा…

मम्मी ,पापा सब डरते हैं ,पर है वह सीधी- सादी;
उनके जैसा प्यार कहाँ है ,जैसा हैं करती दादी .