स्नेह और आशीर्वाद के साथ

07 दिसंबर 2010

सुनिए हमारी कविता जो हमारी दीदी ने सिखाई है

हमें हमारे पड़ोस में रहने वाली रंगोली दीदी ने एक कविता याद करवाई थी। इस कविता को हम सभी को सुनाते भी हैं। एक दिन हमने अपने पिताजी को भी यह कविता सुनाई तो उन्होंने उसका वीडियो बना लिया।
हमने आज उस वीडियो को देखा, देख कर बहुत मजा आया।
आप भी देखिए, मजा आये तो बताइयेगा जरूर।
से...से...से,
हम छोटे हैं,
मम्मी मारती है,
हम रोते हैं,
पापा आते हैं,
बिस्किट लाते हैं,
हम खाते हैं,
मम्मी को चिढ़ाते हैं।


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बताइयेगा जरूर कैसा लगा ये विडिओ और हमारी कविता

1 टिप्पणी:

Akshita (Pakhi) ने कहा…

कित्ती प्यारी कविता...बधाई.
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