स्नेह और आशीर्वाद के साथ

05 अप्रैल 2012

हाथ साफ किये बैडमिन्टन में

इधर बहुत-बहुत दिनों से आप सभी से कोई मुलाकात नहीं हो पाई। जैसा कि आपको पहले बताया था कि हमारे इस ब्लॉग पर हमारे बारे में हमारे पिताजी ही लिखते हैं, हम तो बस दिनभर कुछ न कुछ करते रहते हैं और वे वही सब देखकर आप सभी के बीच पहुँचा देते हैं।

ये उठाई चिड़िया

स बार ऐसा हुआ कि बहुत लम्बा समय निकल गया। घर में चाचा लोगों की शादी थी। दो चाचाओं की शादी थी, जनवरी में लगातार। इस कारण से हमें और हमारे पिताजी को व्यस्त होना ही होना था। आखिर पिताजी अपने सभी भाई-बहिनों में बड़े हैं तो हम भी अपने घर में सबसे बड़े हैं।


ये तैयारी शाट लगाने की


खैर...आज मौका निकाल कर हमने कहा कि कुछ तो हमारे ब्लॉग पर लिख दीजिये। पिताजी के पास कुछ दिनों पुरानी फोटो थी हमारी, बैडमिंटन खेलने की..बस वही आपको बताने जा रहे हैं।

असल में हमारी गली में पर्याप्त जगह है और चाचा लोग वहीं पर रोज रात को बैडमिंटन खेलते हैं। हमें भी शौक लगा खेलने का...। अब बड़ा सा रैकेट तो उठाये नहीं उठता है सा हमारे लिए छोटे-छोटे से दो रैकेट लाये गये। हम उन्हीं के साथ खेल लेते हैं।


और ये लगा स्मैश

आप खुद ही अंदाजा लगा लो कि हमें कितनी अच्छी तरह से खेलना आता है।


1 टिप्पणी:

"रुनझुन" ने कहा…

Good going !!!.....Keep it up!!!