स्नेह और आशीर्वाद के साथ

07 जुलाई 2010

व्यस्त बहुत रहे थे इन दिनों ---- आप खुद देख लो

आप सभी को नमस्ते,
इधर हमारा बहुत दिनों के बाद आना हुआ। गर्मियों में हम अपने नाना के पास चले गए थे। जब लौटे तो उसके बाद शादियों में व्यस्त हो गए।

इसके अलावा हम अपने कामों को करने में भी व्यस्त रहे। खूब घूमाफिरी करके लौटे तो कपडे भी गंदे पड़े थे। सोचा मम्मा धोएगी ही .... अब हम भी बड़े हो गए तो हमने खुद धोने का फैसला किया।

आप देख लीजिये हम सही कह रहे हैं..... अपने कपडे हमने खुद साफ़ किये हैं....





ये लगाया साबुन और उसके बाद घिसा ब्रश...... चमकदार सफेदी के लिए.....



साबुन लगा है तो पानी से भी धोना पड़ेगा.... चलो पानी में डुबकी लगवा दें.....

हो गया साफ़....... अब चलें सुखाने भी डाल दें रस्सी पर.... अभी और भी कपडे धोने हैं....

हाँ, आपको बताते चलें कि हमने अपने काम निपटा लिए हैं अब जल्दी-जल्दी मिला करेंगे।