स्नेह और आशीर्वाद के साथ

14 जुलाई 2010

घोड़े को चलाने में आया बहुत ही मजा

इधर एक दो दिनों से बारिश हो रही है तो मौसम कुछ अच्छा सा हो गया है। अब गर्मी भी कम लग रही है। बाहर खेलने में भी मजा आ रहा है। हम लोग बारिश में नहीं भीगे।

बारिश के कारण दादी कुछ सामान सही करने, कुछ सामान रखने के लिए स्टोर रूम में गईं तो हम भी उनके पीछे हो लिए। वहाँ हमने अपना पुराना घोड़ा देखा। घोड़ा असली वाला नहीं है, वही सी-सॉ करने वाला। बस घोड़ा देखा तो उससे मन हो गया खेलने को।

दादी ने हमारे कहने से उस घोड़े को बाहर निकाला और धोया। घोड़े के नहाने के बाद हम और हमारी छोटी बहिन पौच जी (पलक) उस पर बैठ कर खेलने लगे।

पहले हम आगे बैठे और हमने पिताजी के गाड़ी चलाने की नकल करते हुए अपनी घोड़ानुमा मोटरसाइकिल चलाई। बाद में हम पीछे बैठे और हमारी पौच जी ने गाड़ी चलाई।

घोड़ा अब भी बाहर ही रखा है और हम दोनों बहिनें मौका देखकर उस पर बैठ कर मजा लेती हैं। सचमुच बहुत ही मजा आता है।

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आज पता नहीं क्या हो गया है कोई भी फोटो लोड नहीं हो रही है.....आज की पोस्ट पर आप फोटो नहीं देख पायेंगे....अपने घोड़े के साथ खेलने की फोटो बाद में