स्नेह और आशीर्वाद के साथ

09 सितंबर 2010

शेर और जेब्रा के साथ खेल --- बिना डरे

हमारे लिए एक बहुत छोटा सा किन्तु सुन्दर सा शेर लाया गया। शेर के साथ जेब्रा भी था। आपको आश्चर्य लग रहा होगा? पर डरिये नहीं क्योंकि शेर और जेब्रा असली नहीं थे।


अभी एक दिन हम पिताजी के साथ बाजार घूमने निकले तो बाजार में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कुछ अंकल लोग रंगीन से खिलौने बेच रहे थे। हमने भी लेने को कहा।

उस
समय सामान ज्यादा था तो पिताजी ने कुछ भी नहीं लिया और न ही उन अंकल के पास गाड़ी रोकी। हाँ अगले दिन शाम को हमारे लिए शेर और जेब्रा आ गये।

इन
दोनों जानवरों के साथ एक हैलीकॉप्टर भी आया।

अब
शेर तो आपको दिख रहा है किन्तु बेचारा जेब्रा तो दूसरे दिन ही फट गया। अब फटे जेब्रा की फोटो आपको दिखाते तो आपको भी बुरा लगता। अरे हमें ही बहुत बुरा लग रहा था।


हाँ, याद आया, हैलीकॉप्टर तो धागे से बाँधकर कमरे में लटका रखा है। जब पंखे की हवा चलती है तो गोल-गोल घूमता है। बड़ा मजा आता है।

8 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

really mind is without fear

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

सचमुच, आपकी पोस्ट बहुत बढ़िया है।
--
इसकी चर्चा बाल चर्चा मंच पर भी है!
http://mayankkhatima.blogspot.com/2010/09/16.html

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH ने कहा…

बहुत सुन्दर शेर पकड़ रखा है. बेचारा डर भी रहा है.

अक्षय कटोच *** AKSHAY KATOCH ने कहा…

शेर को रुलाना नहीं ठीक

शैफालिका - ओस की बूँद ने कहा…

खुशा रहो और खूब खेलो

Akshita (Pakhi) ने कहा…

वाह, फिर तो खूब मजा आ रहा होगा....

कविता रावत ने कहा…

Bachhe mujhe bhi behad pyare lagte hai... mere bhi chhote-chhote 2 bachhe hain. sach mein unkee baten kitne massom aur kabhi-kabhi bahut bholee liken sikshprad jaisee hoti hai...
Bahut achha laga aapka blog....
bahut shubhkaamnayne

शुभम जैन ने कहा…

aree wah ye sher to abhut sundar hai...lekin pyari akshayanshi se kam :)

god bless,
khush raho.